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चलना है मुझे और अभी, रुकने का वक्त कहां रोडों पे फिसलना है घावों का वक्त कहां... हमसर मिले की हाथ थामे कोई कंधे से हाथ हटालो थमने का वक्त कहां... है मंजिल अभी अधूरी कदमों की ना मजबूरी छांव का लालच ना दो प्यास का वक्त कहां... है नजर जिस मंजिल पर वहां पहुंच

चलना है मुझे और अभी, रुकने का वक्त कहां रोडों पे फिसलना है घावों का वक्त कहां... हमसर मिले की हाथ थामे कोई कंधे से हाथ हटालो थमने का वक्त कहां... है मंजिल अभी अधूरी कदमों की ना मजबूरी छांव का लालच ना दो प्यास का वक्त कहां... है नजर जिस मंजिल पर वहां पहुंचा, ना चला कोई हम अपना डग बनायेंगे छालों का वक्त कहां... चलना है मुझे और अभी, रुकने का वक्त कहां... #athingaday Dare2Bare™ 😇👍✅

April 28, 2018 at 08:14AM

bit.ly/2FlW59u

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Uploaded on April 28, 2018