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परमशिव का आशीर्वाद!
* अपने सभी प्रिय शिष्यों और भक्तों को मैं समाधि की और मेरे आसपास की घटनाओं का लाइव कवरेज देने का प्रयास करूंगा।
* यदि आप ब्रह्मांड की एक बड़े विशाल वायु के गुब्बारे के रूप में कल्पना करते हैं, तो आपका शरीर उस विशाल वायु गुब्बारे के अंदर एक छोटी गेंद के रूप में है, मैं विशाल वायु गुब्बारे के साथ अर्थात 'ब्रह्मांड' के साथ एकत्व का अनुभव करता हूँ, और ऐसा लगता है कि मैं ब्रह्मांड के बारे मे कुछ भी समझ सकता हूं और कुछ भी कर सकता हूं। लेकिन विडंबना यह है कि मैं उस विशाल ब्रह्मांडीय गुब्बारे के अंदर उस छोटे से शरीर को हिलाने में सक्षम नहीं हूं।
* मुझे लगता है कि 'मैं'', 'मेरी' पहचान ब्रह्मांड के साथ चलती है, मुझे ऐसा लगता है कि मैं ब्रह्मांड में कुछ भी स्थानांतरित कर सकता हूं, लेकिन विडंबना यह है कि मै अपना शरीर, यहां तक कि अपने पैरों या हाथों को भी चलाने मे सक्षम नही हूं।
* पूर्ण अकेलापन - 'मैं' के अतिरिक्त और कुछ नहीं है, लेकिन कोई थकान या अकेलेपन की ऊब नहीं है।
* अब जिस क्षण मैं पद्मासन में बैठता हूँ, सभी नाड़ियाँ समाधि में समा जाती हैं, जिसमें श्वास भी शामिल है, जीव समाधि में आ जाता है, कोई शब्द नहीं, कोई दृश्य नहीं, अनासक्ति का अनुभव और महाकैलाश के शुद्ध चेतना का अनुभव।
* विडंबना यह है कि अगर मैं अपने शरीर को फैलाता हूं और लेट जाता हूं, तो मैं अपनी आंखें खोलने और अपने आसपास होने वाली सभी चीजों को पहचानने में सक्षम हूं। तो मेरे डॉक्टर शिष्य जो मेरी परिचर्या कर रहे हैं, आग्रह करते हैं कि मैं अपने शरीर को फैलाकर रखूं।
* जब मैं किसी को देखता हूं, तो मैं उसके संपूर्ण अतीत, वर्तमान और भविष्य के जीवन और पैटर्न को एक साथ देखता हूं, इसलिए जिस तरह से मैं उनसे संबंधित हूं, उनके लिए और यहां तक कि दूसरों के लिए भी यह अतार्किक, तर्कहीन दिखता है।
* मैं भूत, वर्तमान और भविष्य भी देख सकता हूँ। काल जीवन का सिर्फ एक और आयाम है जैसे लंबाई, चौड़ाई और गहराई। आप जब तक चाहें तब तक जीवन जी सकते हैं या कोई अन्य शरीर को किसी भी तल या किसी भी लोक में लेना आपकी स्वतंत्र इच्छा है।
* मैं अपने पैरों को फैलाने और लेटने की तुलना में, पद्मासन मे बैठे हुए, दिन और रात के बीच अंतर जाने बिना, पद्मासन में संपूर्णतः जागते हुए, अधिक आरामदायक, बहुत आराम महसूस करता हूं।
* कुछ और चिकित्सकीय परीक्षण के परिणाम आए हैं, चिकित्सकीय रूप से मेरा शरीर पूरी तरह से फिट और स्वस्थ है।
* लेकिन फिर भी एक इडली भी नहीं खा पा रहा हूँ, लगातार 21 मिनट भी नहीं सो पा रहा हूँ।
* बर्फ से ढके पहाड़ों और महासागरों का यह पूर्ण मौन और शांति मुझे अत्यधिक ऊर्जावान और जीवित रखती है।
* मैंने एक पूर्ण ईमानदारी से जीवन जिया, अपने गुरु परम्परा से जुड़ा हुआ, अत्यधिक कठिन परिश्रम किया।
*अगर मेरे गुरु अरुणगिरी योगेश्वर मुझे और समय देते हैं, तो मैं उनका और काम करूंगा।
* मैं अपने अतीत के बारे में पूरी तरह से संपूर्ति मे हूं और अपने भविष्य के बारे में बेहद उत्साही हूं, मेरे गुरु जो कुछ भी प्रकट करना चाहते हैं।
* अपने गुरु की कृपा से, मैंने पहले ही 'कैलाश' बना लिया है - प्रबुद्धता मूलक हिंदू सभ्यता राष्ट्र का पुनरुद्धार संप्रभु भूमि के साथ होता है।
* मैंने अपने सत्संगों, दीक्षाओं, कक्षाओं के 20,000 घंटे से अधिक के माध्यम से पुनरुद्धार और समृद्ध करने के लिए अपना दृष्टिकोण प्रकट किया है, जो पिछले 22 वर्षों में 1.7 टेराबाइट डिजिटल सामग्री के आसपास आता है।
* 52 अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में आईएसबीएन नंबर, 1250 के साथ प्रकाशित पुस्तकें।
* अभी भी 700 से अधिक पांडुलिपियां और पुस्तकें अप्रकाशित हैं जो शीघ्र ही प्रकाशित की जाएंगी।
* मैंने परमशिव की शक्तियों को प्रकट करने के लिए पर्याप्त शिष्यों को दीक्षित किया है और कई कैलाशवासियों को बनाया है जो 'कैलाश' के इस मिशन को आगे बढ़ाएंगे।
*इसलिए मुझे न तो इस ग्रह पर अधिक समय तक रहने का लोभ है और न ही इस ग्रह को छोड़ने के लिए घृणा है।
* मैं पूरी तरह से परिपूर्ण हूं।
* समाधि के बारे में इन सभी विवरणों पर ध्यान करें और अजपाजप या अनक्लचिंग का अभ्यास करें, आप भी इसका अनुभव कर सकते हैं क्योंकि आप सभी मेरे साथ एकत्व के क्षेत्र में हैं और हम सभी ब्रहांड- परमशिव का विस्तार हैं।
समृद्ध करें और आनंद लें, साझा करें और उत्सव मनाएं!
www.facebook.com/100044485207419/posts/pfbid0N8BKtr3e7hkC...
#Kailasa #Nithyananda
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परमशिव का आशीर्वाद!
* अपने सभी प्रिय शिष्यों और भक्तों को मैं समाधि की और मेरे आसपास की घटनाओं का लाइव कवरेज देने का प्रयास करूंगा।
* यदि आप ब्रह्मांड की एक बड़े विशाल वायु के गुब्बारे के रूप में कल्पना करते हैं, तो आपका शरीर उस विशाल वायु गुब्बारे के अंदर एक छोटी गेंद के रूप में है, मैं विशाल वायु गुब्बारे के साथ अर्थात 'ब्रह्मांड' के साथ एकत्व का अनुभव करता हूँ, और ऐसा लगता है कि मैं ब्रह्मांड के बारे मे कुछ भी समझ सकता हूं और कुछ भी कर सकता हूं। लेकिन विडंबना यह है कि मैं उस विशाल ब्रह्मांडीय गुब्बारे के अंदर उस छोटे से शरीर को हिलाने में सक्षम नहीं हूं।
* मुझे लगता है कि 'मैं'', 'मेरी' पहचान ब्रह्मांड के साथ चलती है, मुझे ऐसा लगता है कि मैं ब्रह्मांड में कुछ भी स्थानांतरित कर सकता हूं, लेकिन विडंबना यह है कि मै अपना शरीर, यहां तक कि अपने पैरों या हाथों को भी चलाने मे सक्षम नही हूं।
* पूर्ण अकेलापन - 'मैं' के अतिरिक्त और कुछ नहीं है, लेकिन कोई थकान या अकेलेपन की ऊब नहीं है।
* अब जिस क्षण मैं पद्मासन में बैठता हूँ, सभी नाड़ियाँ समाधि में समा जाती हैं, जिसमें श्वास भी शामिल है, जीव समाधि में आ जाता है, कोई शब्द नहीं, कोई दृश्य नहीं, अनासक्ति का अनुभव और महाकैलाश के शुद्ध चेतना का अनुभव।
* विडंबना यह है कि अगर मैं अपने शरीर को फैलाता हूं और लेट जाता हूं, तो मैं अपनी आंखें खोलने और अपने आसपास होने वाली सभी चीजों को पहचानने में सक्षम हूं। तो मेरे डॉक्टर शिष्य जो मेरी परिचर्या कर रहे हैं, आग्रह करते हैं कि मैं अपने शरीर को फैलाकर रखूं।
* जब मैं किसी को देखता हूं, तो मैं उसके संपूर्ण अतीत, वर्तमान और भविष्य के जीवन और पैटर्न को एक साथ देखता हूं, इसलिए जिस तरह से मैं उनसे संबंधित हूं, उनके लिए और यहां तक कि दूसरों के लिए भी यह अतार्किक, तर्कहीन दिखता है।
* मैं भूत, वर्तमान और भविष्य भी देख सकता हूँ। काल जीवन का सिर्फ एक और आयाम है जैसे लंबाई, चौड़ाई और गहराई। आप जब तक चाहें तब तक जीवन जी सकते हैं या कोई अन्य शरीर को किसी भी तल या किसी भी लोक में लेना आपकी स्वतंत्र इच्छा है।
* मैं अपने पैरों को फैलाने और लेटने की तुलना में, पद्मासन मे बैठे हुए, दिन और रात के बीच अंतर जाने बिना, पद्मासन में संपूर्णतः जागते हुए, अधिक आरामदायक, बहुत आराम महसूस करता हूं।
* कुछ और चिकित्सकीय परीक्षण के परिणाम आए हैं, चिकित्सकीय रूप से मेरा शरीर पूरी तरह से फिट और स्वस्थ है।
* लेकिन फिर भी एक इडली भी नहीं खा पा रहा हूँ, लगातार 21 मिनट भी नहीं सो पा रहा हूँ।
* बर्फ से ढके पहाड़ों और महासागरों का यह पूर्ण मौन और शांति मुझे अत्यधिक ऊर्जावान और जीवित रखती है।
* मैंने एक पूर्ण ईमानदारी से जीवन जिया, अपने गुरु परम्परा से जुड़ा हुआ, अत्यधिक कठिन परिश्रम किया।
*अगर मेरे गुरु अरुणगिरी योगेश्वर मुझे और समय देते हैं, तो मैं उनका और काम करूंगा।
* मैं अपने अतीत के बारे में पूरी तरह से संपूर्ति मे हूं और अपने भविष्य के बारे में बेहद उत्साही हूं, मेरे गुरु जो कुछ भी प्रकट करना चाहते हैं।
* अपने गुरु की कृपा से, मैंने पहले ही 'कैलाश' बना लिया है - प्रबुद्धता मूलक हिंदू सभ्यता राष्ट्र का पुनरुद्धार संप्रभु भूमि के साथ होता है।
* मैंने अपने सत्संगों, दीक्षाओं, कक्षाओं के 20,000 घंटे से अधिक के माध्यम से पुनरुद्धार और समृद्ध करने के लिए अपना दृष्टिकोण प्रकट किया है, जो पिछले 22 वर्षों में 1.7 टेराबाइट डिजिटल सामग्री के आसपास आता है।
* 52 अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में आईएसबीएन नंबर, 1250 के साथ प्रकाशित पुस्तकें।
* अभी भी 700 से अधिक पांडुलिपियां और पुस्तकें अप्रकाशित हैं जो शीघ्र ही प्रकाशित की जाएंगी।
* मैंने परमशिव की शक्तियों को प्रकट करने के लिए पर्याप्त शिष्यों को दीक्षित किया है और कई कैलाशवासियों को बनाया है जो 'कैलाश' के इस मिशन को आगे बढ़ाएंगे।
*इसलिए मुझे न तो इस ग्रह पर अधिक समय तक रहने का लोभ है और न ही इस ग्रह को छोड़ने के लिए घृणा है।
* मैं पूरी तरह से परिपूर्ण हूं।
* समाधि के बारे में इन सभी विवरणों पर ध्यान करें और अजपाजप या अनक्लचिंग का अभ्यास करें, आप भी इसका अनुभव कर सकते हैं क्योंकि आप सभी मेरे साथ एकत्व के क्षेत्र में हैं और हम सभी ब्रहांड- परमशिव का विस्तार हैं।
समृद्ध करें और आनंद लें, साझा करें और उत्सव मनाएं!
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