Jyoti'S... on and off. :)
Fall... [Explore - Front Page]
Thanks all!! :)
सुना है उस राह में कभी रंग हुआ करते थे,
आज देखा उस जगह बस वीरानी ही वीरानी है।
जहां कभी धूप तेरे साये को चूमता था,
आज उस जगह बस अब, बारिश का गीला-गीला पानी है।
धूप में तपते झुलसते ये पत्ते कभी दो बून्द ओस को तरसते थे,
आज इस जगह मौसम ही कुछ अलग है।
अब इन पत्तों कि कुछ अलग ही कहानी है।।
- जीतू (उर्फ ज्योति)
No graphics in the comments please !!
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सुना है उस राह में कभी रंग हुआ करते थे,
आज देखा उस जगह बस वीरानी ही वीरानी है।
जहां कभी धूप तेरे साये को चूमता था,
आज उस जगह बस अब, बारिश का गीला-गीला पानी है।
धूप में तपते झुलसते ये पत्ते कभी दो बून्द ओस को तरसते थे,
आज इस जगह मौसम ही कुछ अलग है।
अब इन पत्तों कि कुछ अलग ही कहानी है।।
- जीतू (उर्फ ज्योति)
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